ख़ुशी क्या है ? Happiness Meaning In Hindi | Real Happiness

What Is Happiness

ख़ुशी क्या है ? ( Happiness Meaning In Hindi) – एक ऐसा शब्द जिसे सुनते ही चेहरे पर एक मुस्कराहट आ आती है और हमे जीने का हौसला देती है |

लेकिन आज हम सभी कहीं न कहीं बहुत उदास हैं और जीवन में खुशियाँ  (Happiness) तलाश रहे हैं|

आपने अक्सर देखा होगा सब कुछ होने के बावजूद कुछ लोग रोना नहीं छोड़ते, बल्कि दूसरी और कुछ न होने या कम होने पर भी  बेहद खुश रहते हैं |

क्या आपने कभी सोचा है ?

  • जीवन में असली ख़ुशी क्या है ?
  • ख़ुशी का क्या रहस्य है ?
  • इंसान को ख़ुशी कब मिलती है ?
  • क्या  ख़ुशी को ढूंढना पड़ता है?
  • ख़ुशी  के पहलू क्या हैं ? या
  • क्या ख़ुशी कुछ चंद लोगों के दायरे का हिस्सा है?

दोस्तों, आज सरल युक्ति के माध्यम से मैं आपको  इन सभी सवालों के जवाब देना चाहूंगा |

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असली ख़ुशी Real Happiness

जीवन में असली ख़ुशी क्या है ?

What Is Real Happiness

ख़ुशी (Happiness) पर कई अलग- अलग विचार हो सकते हैं और ख़ुशी का अर्थ भी अनेक तरीकों से लिया जा सकता है लेकिन ख़ुशी तो बस एक भीतरी एहसास (Inner Feeling) है जो  खुल कर जीना सीखती है |

जीवन की अलसी ख़ुशी दूसरों की खुशियों में शामिल होकर मिली आत्मिक संतुष्टि से है जो व्यक्ति  को खुशियों से भर देती है |

दोस्तों, ख़ुशी का रहस्य भी ठीक वैसे ही काम करता है जैसे  गुरुत्वाकर्षण का नियम ( Law Of Gravity) यानी जिस तरह किसी वस्तु को उप्पर फेंकते ही वह तुरंत (Instant) ही  नीचे आ गिरती है |

ठीक उसी तरह दूसरों के साथ बांटी गयी खुशियां भी आपकी खुशियों को कई गुना बढ़ा देती है |

ख़ुशी को कहीं ढूढ़ने की ज़रूरत  नहीं बल्कि ये सबके अंदर ही है और इस पर सबका हक़ है | ख़ुशी ना ही उम्र देखती है और न ही पद प्रतिष्ठा (Rank reputation)|

दोस्तों, मैंने ज़िन्दगी के अनुभवों (Experiences) से जाना है कि संतुष्टि का हमारी खुशियों (Happiness) से बहुत ज्यादा सबंध नहीं है, क्यूंकि संतुष्टि (Satisfaction) बस कुछ समय के लिए ही मिलती है और जब संतुष्टि खत्म या पूरी हो जाती है तो फिर से ख़ुशी तलाशने की ज़रूरत पड़  जाती है |

याद रहे : जो कुछ नहीं है उसमें  दुखी होने से बेहतर है जो है  उसमे बेहद खुशिया मनाई जाएँ |

चलिए Happy Tips के माध्यम से ख़ुशी के पहलुओं को समझने  की कोशिश करते हैं |

 

 1) बाहरी पहलू (External Aspect) :

जैसे मैंने ऊपर बताया कि ख़ुशी एक भीतरी एहसास है, लेकिन लोग अक्सर इसे बाहर खोजते हैं |

तभी लोगों की खुशियाँ या तो कुछ ही समय के लिए रह जाती हैं  या खत्म हो जाती हैं | बाहरी ख़ुशी (Happiness) का सम्बन्ध कुछ हद तक संतुष्टि से लिए जा सकता है जैसे :

  • यदि ये घर मेरा हो जाये तो मुझे ख़ुशी होगी|
  • यदि नौकरी या व्यवसाय  से मिलने वाली कमाई बढ़ जाये तो मुझे ख़ुशी होगी |
  • किसी सुन्दर जीवनसाथी की तलाश पूरी होने की ख़ुशी |
  •  परिवार से सम्बंधित खुशियाँ |
  • किसी वस्तु से इच्छाओं की पूर्ति  से सम्बंधित खुशियाँ इत्यादि |

अक्सर आपने देखा होगा हम अपनी पूरी ज़िन्दगी इन्हीं सब को हासिल करने में लगा देते हैं और इसको पाने के लिए किसी भी हद तक गुज़र कर  गुनाह तक कर बैठते हैं फिर चाहे वो अपना हो या पराया और अंत में खाली हाथ इस दुनिया से चले जाते हैं |

यदि ये बस बाहरी खुशियां मिल भी जाये तो चंद समय (Limited Time) के लिए ही संतुष्टि देंगी , जो जीवन का  बस एक हिस्सा हैं|

ज़रूरत है इनके प्रति जुड़ाव से बचकर  खुद को बदलने की |

याद रहे : इसका मतलब ये नहीं कि इनको हासिल करना गलत है बल्कि लक्ष्य है आंतरिक ख़ुशी (Internal Happiness) की ओर बढ़ना जो आपको बेहद संतुष्टि से भर देगी |

 

2) आंतरिक पहलू (Internal Aspect):

ये ख़ुशी का वो पहलू  है जिसमे किसी से जुड़ाव की ज़रूरत महसूस नहीं होती और आप जीवन की सच्चाईयों को समझने और ईश्वर से जुड़ने लगते हैं |

यह ख़ुशी का वो एहसास है जो आपकी खुद से पहचान कराती  है और आपका जीवन हर्ष और उल्लास (Joy and glee)से भरकर आँखों में चमक भर देती है |

आप बताये गए ख़ुशी के रहस्य को कहीं न कही इससे जोड़ कर भी देख सकते हो जो आंतरिक ख़ुशी की ओर बढ़ता एक कदम है |

दोस्तों, आंतरिक ख़ुशी का आपकी बाहरी ख़ुशी के बहुत ज्यादा सम्बन्ध नहीं है क्यूंकि यदि बाहरी पहलू के सुख मिल भी जाएं तो ज़रूरी नहीं आप अंदर से शांत और ख़ुश महसूस करेंगे | जैसे :

इसका सीधा उदारहण किसी गरीब व्यक्ति की ज़िन्दगी से लिया जा सकता है जो कुछ न होने या बहुत कम होने के बावजूद खुश रहता है और अपने परिवार के साथ चैन की नींद सोता है, वहीँ दूसरी तरफ आज कितने ही अमीर लोग हैं जो बिमारियों से घिरे हुए हैं और  बैचनी से भरपूर  सोने के लिए दवाईयों का सहारा तक लेते हैं |

याद रहे : इसका मतलब ये नहीं कि पैसा कमाना या होना गलत चीज़ हैं बल्कि इसका आपकी आंतरिक ख़ुशी से बहुत ज्यादा सबंध नहीं है, क्यूंकि :

  • पैसा आपको बाहरी सहूलतों का सुख ज़रूर दे सकता है लेकिन मानसिक शांति नहीं |
  • बेहतर इलाज़ दे सकता है लेकिन अच्छी सेहत नहीं |
  • बेहतरीन गद्दे खरीद सकता है लेकिन अच्छी नींद नहीं इत्यादि |

आंतरिक ख़ुशी को आप  आनंद का क्षण (Bliss Moment) भी कह सकते हैं यानि खुद में बेहद आनंदित रहना | इसके लिए आत्मा के उद्देश्य (Soul Purpose) को समझना पड़ेगा ,  जिससे आपके जीवन में बेहतरीन बदलाव आएंगे जैसे :

  •  खुद को समझना |
  • जीवन में ठहराव आना |
  • खुद पर नियंत्रण |
  • बेहद मानसिक शांति |
  • इच्छाओं  में कमी  इत्यादि  |

ये ख़ुशी का वो पहलू है आपको विवेकशील (Rational) बनाएगी, आप अंदर से इतने हलके महसूस करेंगे कि जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं आपको विचलित (Distract) नहीं कर पाएंगी|

इसीलिए ज़रूरत है खुश रहने के तरीकों को खुद में उतारकर ख़ुशी के साथ आगे बढ़ा जाये जो आपको जीवन के सच्चे मायने ( Life Lesson) बताएगी |

 

निष्कर्ष (conclusion) :

दोस्तों,  एक बेहतर जीवन जीने के लिए ख़ुशी के दोनों पहलुओं का अपना विशेष महत्व है और हमे चाहिए कि हम अपनी ज़रूरतों के हिसाब ख़ुशी के पहलुओं को जीवन में अपनाये ताकि जो ज़िन्दगी रंगहीन सी हो गयी है उसमें एक ताज़गी आ सके |

मैं आशा करता हूँ सरल युक्ति के माध्यम से लिखा मेरा लेख  “ख़ुशी क्या है” ? आपको पसंद आया होगा और आपको “Meaning Of  Happiness In Hindi” को समझने में सहायता मिली होगी | आप इस लेख को शेयर भी कर सकते हैं और अपने सुझाव मुझको भेज सकते हैं जिससे मुझे और बेहतर लिखने की प्रेरणा (Inspiration) मिलेगी |

इसे भी पढ़ें : खुश रहने के बेहतरीन तरीके |

 

हमेशा खुश रहिये और मुस्कुराते रहिये ||

धन्यवाद |

 

 

 

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